ठाणे जिले के भिवंडी शहर में स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में बड़ा खुलासा हुआ है। यहां चार महिलाओं पर बिना वैध लाइसेंस के अवैध क्लिनिक चलाने का मामला दर्ज किया गया है। बताया जा रहा है कि ये महिलाएं खुद को डॉक्टर बताकर मरीजों का इलाज कर रही थीं और एलोपैथिक दवाइयाँ तक लिख रही थीं, जबकि इनके पास किसी प्रकार की चिकित्सा योग्यता नहीं थी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई आठ अक्टूबर को भिवंडी-निजामपुर शहर नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई छापेमारी के दौरान हुई। नगर निगम की टीम ने पुलिस के साथ मिलकर गायत्री नगर और गांधी नगर इलाकों में छापे मारे। इस दौरान ऐसे कई क्लिनिक पाए गए जहाँ अयोग्य व्यक्ति न केवल मरीजों का इलाज कर रहे थे बल्कि इंजेक्शन लगाने और दवाएं देने का काम भी खुलेआम कर रहे थे।
नगर निगम के चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोहम्मद शोएब अंसारी ने इस मामले में भिवंडी पुलिस को औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने चार महिलाओं – सलमा बानो जनुएल शेख (40 वर्ष), नीलम रतन चौरसिया (39 वर्ष), नुसरत बानो सुफियान खान (46 वर्ष) और नासाद बानो मुमताज अंसारी (44 वर्ष) के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
पुलिस ने छापेमारी के दौरान क्लिनिक से भारी मात्रा में दवाइयाँ, इंजेक्शन, चिकित्सा उपकरण और फर्जी प्रमाणपत्र बरामद किए हैं। यह सभी सामग्रियाँ जांच के लिए जब्त कर ली गई हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ये महिलाएं बिना किसी मेडिकल डिग्री या मान्यता के इलाज कर रही थीं, जिससे मरीजों की जान को गंभीर खतरा हो सकता था।
फिलहाल इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं की गई है, लेकिन पुलिस ने बताया कि जांच जारी है और दस्तावेजों की सत्यता की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि शहर में फर्जी चिकित्सकों और अवैध क्लीनिकों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।
स्वास्थ्य विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि इलाज के लिए हमेशा पंजीकृत और योग्य डॉक्टरों से ही परामर्श लें तथा ऐसे फर्जी क्लिनिकों की जानकारी तुरंत पुलिस या नगर निगम को दें।
👉 यह मामला फिर से इस बात की याद दिलाता है कि फर्जी डॉक्टरों और अवैध क्लिनिकों की गतिविधियाँ न केवल कानून का उल्लंघन हैं बल्कि आम जनता के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा हैं।
