गड्ढों से हुई मौतों में देना होगा मुआवजा – बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा आदेश

शाखा 9 न्यूज़ – विशेष रिपोर्ट

मुंबई: महाराष्ट्र में सड़कों पर गड्ढों से हो रही मौतों पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सोमवार को दिए गए एक ऐतिहासिक आदेश में हाई कोर्ट ने कहा है कि अब सड़कों के गड्ढों से होने वाली हर मौत पर पीड़ित परिवार को मुआवजा देना अनिवार्य होगा।


⚖️ अदालत का आदेश

हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि राज्य के सभी नगर निगमों और सड़क एजेंसियों में विशेष कमेटियां बनाई जाएं।
ये कमेटियां गड्ढों से हुई किसी भी मौत की जानकारी मिलने पर — चाहे वो मीडिया रिपोर्ट से ही क्यों न हो, स्वतः संज्ञान लेकर मुआवजे की प्रक्रिया पूरी करेंगी।मुआवजे की राशि ₹50,000 से ₹2,50,000 तक होगी, और यह रकम उन ठेकेदारों के फंड से दी जाएगी जिन्होंने सड़कें बनाई हैं।
इस फैसले के साथ अब ठेकेदारों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।


🚧 ठेकेदारों और अधिकारियों पर कार्रवाई का आदेश

हाई कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए कहा कि जिम्मेदार ठेकेदारों और अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही यह भी निर्देश दिया कि जैसे ही किसी गड्ढे की जानकारी मिले, उसे 48 घंटे के भीतर भरना अनिवार्य होगा, अन्यथा कार्रवाई की जाएगी।मृतक के परिजन यदि मुआवजे के लिए आवेदन करते हैं, तो उन्हें 6 से 8 हफ्तों के भीतर भुगतान मिल जाना चाहिए।
कोर्ट ने 21 नवंबर तक सभी नगर निगमों से आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट मांगी है।


🧒 डोंबिवली हादसे से शुरू हुआ मामला

यह मामला तब सामने आया जब डोंबिवली में एक छोटे बच्चे की मैनहोल में गिरकर मौत हो गई थी।
याचिकाकर्ता रुजू ठक्कर ने अदालत में बताया कि नगर निगम ने उस मैनहोल पर सुरक्षात्मक ग्रिल लगाई ही नहीं थी।
इसी के बाद अदालत ने सभी नगर निगमों को आदेश दिया कि वे बताएँ —
उनके इलाके में कुल कितने मैनहोल हैं और कितनों पर ग्रिल लगी हुई है।


नागरिकों का मौलिक अधिकार

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि “सही और सुरक्षित सड़कें नागरिकों का मौलिक अधिकार हैं,” जो संविधान के अनुच्छेद 21 — जीवन के अधिकार — का एक हिस्सा है।
कोर्ट ने कहा कि सड़कों और फुटपाथ का उद्देश्य नागरिकों को सुरक्षित यात्रा और आवाजाही की सुविधा देना है।
इसलिए, प्रशासन और ठेकेदार दोनों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि सड़कों पर किसी की जान गड्ढों में न जाए।


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