इंदौर में तनाव उभराः 24 किन्नरों ने सामूहिक रूप से जहर पी लिया — मामले की गुत्थी में “फिनाइल, दुष्कर्म एवं ब्लैकमेल” आरोप

इंदौर : 16 अक्तूबर 2025 – मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में देर रात एक भयावह घटना सामने आई, जहाँ लगभग 24 किन्नरों ने एक साथ फिनाइल पी लिया। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन एवं पुलिस हाई अलर्ट पर आ गए।


घटना की पृष्ठभूमि

मिली जानकारी के अनुसार, इस घटना का कारण दो गुटों — “पायल गुरु” गुट एवं “सपना हाजी” गुट — के बीच चल रहा विवाद बताया जा रहा है, जो लंबे समय से वर्चस्व संघर्ष की जड़ में था।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, कथित पत्रकार पंकज और उनका सहयोगी अक्षय आरोपित किए गए हैं। आरोप है कि उन्होंने एक गुट के सदस्यों को धमकी, ब्लैकमेल और दुष्कर्म की शिकायत के डर से दवाब बनाया। जब किन्नर समाज के लोग विरोध करने लगे, तो तनाव बढ़ गया।

पड़ोसी निवासियों के मुताबिक, नंदलालपुरा और एम आर-10 इलाकों में कुछ किन्नरों ने कमरे बंद कर फिनाइल लिया।


बचाव एवं अस्पताल पहुँचाना

घटना की सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कमरे का दरवाजा तोड़ा और सभी को तुरंत एमवाय अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बसंत कुमार निंगवाल ने बताया कि अधिकांश मरीजों की स्थिति सामान्य है, लेकिन दो की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें ICU में भर्ती कराया गया है।

कुछ किन्नरों ने आत्मदाह की भी कोशिश की। पुलिस ने तत्काल चार नामजद आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया है।


कानूनी पहल और आगे की कार्रवाई

पंढरीनाथ थाना पुलिस ने आरोपियों पंकज, अक्षय, सपना हाजी एवं राजा हाशमी के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि वे जल्द ही आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए दबिश देंगे।

पुलिस जांच में यह भी पता लगाने का प्रयास है कि फिनाइल किस स्रोत से आया और किस तरह यह किन्नरों के बीच पँहुचा। प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया गया है कि कुछ पीड़ितों की हालत स्थिर है, अन्य की निगरानी जारी है।


सामाजिक और मानवीय आयाम

यह घटना न केवल इंदौर बल्कि पूरे समाज में चिंता पैदा कर रही है। किन्नर समुदाय के अंदर चल रहे कलह, मानसिक आघात, दबे आरोपों और असुरक्षा भावना ने इस घटना को और जटिल बना दिया है।

समाजसेवियों एवं वकालतियों ने मांग की है कि पीड़ितों को सुरक्षित अंतरिम आवास, चिकित्सा सहायता और कानूनी सुरक्षा प्रदान की जाए। इस घटना को “सामूहिक आत्महत्या प्रयास” की श्रेणी में देखा जा रहा है, जिसमें सामाजिक दबाव और उत्पीड़न का गहरा असर संकेतित है।


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